बिहार के राज्यपाल ने किया राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ, शिक्षा व चिकित्सा को बताया समाज की असली रीढ़

विवेक कुमार यादव । ब्युरो । बिहार / झारखंड । 


पटना |
प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन (PSACWA) के राष्ट्रीय मुख्यालय, पटना में रविवार को इतिहास रचते हुए देशभर के निजी विद्यालयों के नर्सरी शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम PSACWA और भारत सरकार के कौशल विकास मंत्रालय (MEDE) के बीच हुए समझौते (MoU) के अंतर्गत संचालित किया जाएगा।

कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के माननीय राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा और चिकित्सा को समाज की असली रीढ़ बताते हुए कहा कि जब शिक्षक और चिकित्सक संस्कारित, शिक्षित और समर्थ होते हैं, तभी राष्ट्र प्रगति करता है।


????️ राज्यपाल का प्रेरणादायक संबोधन:

राज्यपाल ने कहा, “शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं है, यह नैतिकता, आत्मबोध और सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में पहला कदम है। शिक्षक वह दीपक है, जो हजारों जिंदगियों को रोशन करता है।”

उन्होंने इस अभियान को “राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान अभियान” के रूप में विस्तार देने का आह्वान किया और कहा कि बिहार से शुरू हुआ यह प्रयास पूरे देश को नई दिशा देगा। राज्यपाल ने PSACWA द्वारा लिए गए इस साहसिक कदम की सराहना की और बिहार को पहला राज्य बनने पर बधाई दी।


???? प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति:

कार्यक्रम में डॉ. अब्दुल अहमद हई, फादर पीटर, डॉ. एस. पी. वर्मा, प्रो. एस. पी. शाही, डॉ. श्याम नारायण कुंअर, डॉ. देवानंद झा, समेत 400 से अधिक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।


???? अध्यक्ष शमायल अहमद का वक्तव्य:

PSACWA के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शमायल अहमद ने कहा कि यह MoU केवल एक कागज़ी करार नहीं, बल्कि शिक्षक सशक्तिकरण और शिक्षा प्रणाली के सुधार की दिशा में ठोस पहल है। उन्होंने बताया कि आने वाले 6 महीनों में देशभर के सभी जिलों में चरणबद्ध ढंग से प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।


???? आभार व संचालन:

कार्यक्रम का सफल मंच संचालन राष्ट्रीय सचिव फौजिया खान ने किया और अंत में बिहार इकाई अध्यक्ष द्वारा सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया गया। इस मौके पर श्री संजीव चौरसिया, फरहत हुसैन, श्री तमाल मुखर्जी, श्री अनिल कुमार समेत कई प्रमुख हस्तियाँ उपस्थित रहीं।


✍️

इस ऐतिहासिक आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा सुधार की दिशा में निजी विद्यालयों की भूमिका अब केवल सहायक नहीं, बल्कि निर्णायक होगी। बिहार से शुरू हुआ यह अभियान आने वाले वर्षों में भारत की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ सिद्ध हो सकता है।

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