बिहार राज्य के मधुबनी जिले के फुलपरास विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधान सभा की सदस्य एवं जनता दल (यूनाइटेड) के चुनाव चिन्ह पर जीत हासिल करने वाली महिला राजनीतिज्ञ शीला कुमारी मण्डल के अलोला गाँव की बदहाली बयां करती बिहार में एनडीए के विकास की रफ्तार ।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एक बार फिर जनता और जनप्रतिनिधि के बीच की दूरी सुर्खियों में है। मामला है मधुबनी जिले के घोघरडीहा प्रखंड के अलोला गाँव का जहाँ के लोग आज भी टूटे पुल और खराब रास्ते की मार झेल रहे हैं। अलोला गाँव से होकर गुजरने वाला रास्ता कभी लोगों के जीवन का सहारा था। लेकिन बीते साल बाढ़ के समय में गाँव को जोड़ने वाला पुराना पुल तोड़ दिया गया, ताकि उसी जगह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नया पुल बनाया जा सके। पुराने पुल को तो तोड़ दिया गया, लेकिन नया पुल अब तक अधूरा पड़ा है। बदले में गाँव वालों की सुविधा के लिए बगल से एक अस्थायी डायवर्जन बनाया गया, जहाँ पहले मिट्टी, फिर ईंट का रबिश डालकर रास्ता तैयार किया गया। लेकिन जैसे ही बारिश या बाढ़ का मौसम आता है वही रास्ता कीचड़ और गड्ढों में बदल जाता है। गाँव के लोगों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों को अब मजबूरन पढ़ाई छोड़नी पड़ती है, क्योंकि पुल टूटने के बाद से सुरक्षित रास्ता ही नहीं बचा। सबसे बड़ी बात यह है कि — फुलपरास विधानसभा क्षेत्र की विधायक एवं बिहार सरकार में परिवहन मंत्री, शीला कुमारी मंडल के बारे में लोगों का कहना है कि वह अब तक गाँव की इस गंभीर समस्या को देखने तक नहीं आईं। गाँव की महिलाएँ, बच्चे, बुजुर्ग — सबको हर दिन इस बदहाल रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। बाढ़ के वक्त हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोगों को बाजार या अस्पताल तक पहुँचने में घंटों लग जाते हैं। अब जबकि बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियाँ तेज़ हैं, अलोला गाँव के लोग सवाल उठा रहे हैं — “विकास के वादे तो बहुत हुए, लेकिन अगर पुल ही नहीं जुड़ा, तो भरोसा किस पर करें?” गाँव वाले अब प्रशासन और सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि नया पुल और सड़क जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि आने वाले दिनों में उन्हें फिर से अपने ही गाँव तक पहुँचने के लिए संघर्ष न करना पड़े।








