27 सितंबर से सदस्य नामांकन अभियान की शुरुआत, उत्तर प्रदेश के हर जिले में बनेगी जिला कार्यकारिणी; उत्तराखंड समेत कई राज्यों में संगठन विस्तार की तैयारी
विशेष संवाददाता | आदित्य कुमार सिंह
लखनऊ। पर्वतीय समाज को एकजुट, संगठित और सशक्त बनाने की दिशा में भारतीय पर्वतीय महासभा ने देशव्यापी विस्तार की रणनीति तैयार की है। लखनऊ में आयोजित महासभा की मासिक बैठक में संगठन के विस्तार, सामाजिक सरोकारों और आगामी कार्ययोजना को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से डॉ. अनुपम सिंह भंडारी को भारतीय पर्वतीय महासभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद डॉ. भंडारी के नेतृत्व में महासभा को गांव से लेकर जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक मजबूत संगठनात्मक स्वरूप देने की कार्ययोजना तैयार की गई। संगठन का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे पर्वतीय समाज के लोगों को एक साझा मंच पर लाकर सामाजिक एकता और सहयोग को मजबूत करना है।
नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को सौंपी गई जिम्मेदारियां
बैठक के दौरान भारतीय पर्वतीय महासभा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। विभिन्न पदाधिकारियों को संगठन को प्रभावी एवं सक्रिय बनाने की जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
- श्री पान सिंह भंडारी — मुख्य राष्ट्रीय संरक्षक
- श्री दया कृष्ण डाला कोटी — मुख्य संयोजक
- श्री मोहन चंद्र जोशी — कोषाध्यक्ष
- डॉ. अमित पांडे — उपाध्यक्ष
- श्री रजनीश डोबरियाल — संयुक्त सचिव
- श्री भारत पांडे — प्रचार सचिव
- श्री बलवंत सिंह — प्रचार सचिव
नवनियुक्त पदाधिकारियों ने महासभा को सक्रिय, पारदर्शी और प्रभावी संगठन बनाने तथा समाज के अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का संकल्प व्यक्त किया।
उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में गठित होगी जिला कार्यकारिणी
संगठन विस्तार को लेकर बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसके तहत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में जिला कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
इसके अलावा उत्तराखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों में भी प्रदेश, जिला एवं स्थानीय स्तर पर संगठन के विस्तार की योजना तैयार की गई है।
महासभा से जुड़ने के इच्छुक सक्रिय, योग्य और समाज के प्रति समर्पित लोगों के लिए 27 सितंबर से सदस्य नामांकन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संगठन में जिम्मेदारियां केवल पद के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति की सक्रियता, क्षमता, सामाजिक प्रतिबद्धता और संगठन के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए तय की जाएंगी।
समाजसेवा और सामाजिक एकता होगी प्राथमिकता
भारतीय पर्वतीय महासभा का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार अथवा सदस्य संख्या बढ़ाना नहीं है। महासभा पर्वतीय समाज में एकता, सहयोग, सामाजिक समरसता और सेवा की भावना को मजबूत करने पर विशेष जोर देगी।
युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, उद्यमियों, कर्मचारियों और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत पर्वतीय समाज के लोगों को एक मंच पर लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को संगठित और प्रभावी तरीके से उठाने, जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए पहल करने तथा नई पीढ़ी को पर्वतीय समाज की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने को भी महासभा की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
“देशभर के पर्वतीय समाज को एक मजबूत मंच पर लाना हमारा संकल्प” — डॉ. अनुपम सिंह भंडारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद डॉ. अनुपम सिंह भंडारी ने सभी पदाधिकारियों और सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों में रहने वाले पर्वतीय समाज के लोगों को एक मजबूत मंच से जोड़ना और संगठन को जमीनी स्तर तक पहुंचाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
डॉ. भंडारी ने कहा, “किसी भी संगठन की वास्तविक शक्ति उसके पदों में नहीं, बल्कि उसके कार्यकर्ताओं की सक्रियता, समाज के विश्वास और सेवा की भावना में होती है।”
उन्होंने कहा कि भारतीय पर्वतीय महासभा को ऐसा सशक्त मंच बनाया जाएगा, जहां एकता, सहयोग, सेवा, सम्मान और समाजहित सर्वोच्च प्राथमिकता होंगे।
उन्होंने नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों एवं महासभा के सभी सदस्यों से संगठन विस्तार में पूरी निष्ठा, अनुशासन और सक्रियता के साथ योगदान देने का आह्वान किया।
देशव्यापी विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
बैठक के समापन पर नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी गईं। साथ ही भारतीय पर्वतीय महासभा को देशभर में एक मजबूत एवं प्रभावी संगठन के रूप में स्थापित करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
27 सितंबर से शुरू होने वाली सदस्य नामांकन प्रक्रिया को महासभा के देशव्यापी विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। महासभा ने समाज के सक्रिय एवं समर्पित लोगों से आगे आकर संगठन से जुड़ने और “संगठित समाज, सशक्त समाज” की दिशा में योगदान देने का आह्वान किया है।
महासभा का संदेश
“एकता से शक्ति • संगठन से पहचान • सेवा से सम्मान”
भारतीय पर्वतीय महासभा








