संवाददाता: जुगल सिंह सोलंकी । राजस्थान ।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आज एक प्रेरणादायक और पर्यावरण-संवेदनशील पहल के तहत ग्राम जारोड़ा कलां में “सृजन की सुरक्षा” अभियान के अंतर्गत एक नवजात बालिका के जन्म पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम पिपलांत्री मॉडल (राजसमंद) से प्रेरित था, जिसमें ईको-फेमिनिज्म को अपनाते हुए नारी और प्रकृति के संरक्षण को एक साथ जोड़ा गया।

???? हरित बालिका के जन्म पर लगा पौधा, मिला विशिष्ट पहचान पत्र-
कार्यक्रम का आयोजन सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेडता, स्वाति शर्मा के निर्देशन में हुआ।
बालिका योगिता, पुत्री महादेवराम, के जन्म की खुशी में पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जारोड़ा कलां के पास स्थित सार्वजनिक भूमि पर पौधारोपण किया गया।
अधिकार मित्र जुगल सिंह ने मौके पर एक जागरूकता शिविर आयोजित कर बालिका के पिता को “हरित बालिका विशिष्ट पहचान पत्र” सौंपा। इस पहचान पत्र के माध्यम से बालिका को मिलेगी:
- चिकित्सा सुविधाएं
- शैक्षणिक अवसर
- स्वास्थ्य सेवाएं
- सरकारी योजनाओं का लाभ
- सामाजिक सुरक्षा तक सुलभ पहुंच
???? सामाजिक भागीदारी और समर्थन-
इस कार्यक्रम में पर्यावरण प्रेमी रामचंद्र पिचकिया, उपसरपंच रामकुंवार जाजड़ा, वन विभाग से गजेन्द्र सिंह और भंवराराम सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
स्थानीय ग्रामीणों – मदन जाजड़ा, सुभाष जाजड़ा, रवींद्र जाजड़ा, रणजीत जाजड़ा, श्यामलाल मेघवाल, महेराम मेघवाल, रामरतन पटेल आदि – ने भी भाग लेकर अभियान को समर्थन दिया।
???? ‘सृजन की सुरक्षा’ : बालिका और पर्यावरण दोनों का उत्सव-
यह अभियान सिर्फ एक पौधारोपण नहीं, बल्कि नवजात कन्या के जन्म को उत्सव की तरह मनाकर समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने वाला कदम है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लिंग समानता और सरकारी योजनाओं से प्रभावी जुड़ाव जैसे उद्देश्यों को लेकर यह एक आदर्श ग्रामीण पहल बनती जा रही है।








