स्पेशल रिपोर्ट — विवेक कुमार यादव । ब्युरो। बिहार / झारखंड ।
भूमि सुधार विभाग की रिपोर्ट में आठ योजनाओं के क्रियान्वयन के आधार पर जिला रैंकिंग जारी, जनकल्याण योजनाओं की सटीक पड़ताल ।
पटना:
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा ज़मीन से जुड़ी जन सुविधाओं के क्रियान्वयन पर ज़मीनी पड़ताल के बाद एक अहम रिपोर्ट सामने आई है। इसमें बिहार के सभी जिलों की परफॉर्मेंस का आंकलन आठ प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन के आधार पर किया गया है। इस मासिक मूल्यांकन में बांका ज़िला सबसे ऊपर रहा है, जबकि पूर्वी चंपारण ने 22वें स्थान से तीसरे स्थान तक की जबरदस्त छलांग लगाई है।
इस आकलन का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि ज़मीनी योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है।
योजनाओं की समीक्षा और रैंकिंग का आधार:
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जिन आठ प्रमुख योजनाओं को आधार बनाया गया है, वे हैं:
- दाखिल-खारिज पर्यवेक्षण (25 अंक)
- परिमार्जन प्लस पर्यवेक्षण (25 अंक)
- अभियान बसेरा-2 (20 अंक)
- आधार सीडिंग (5 अंक)
- एडीएम कोर्ट (2.5 अंक)
- डीसीएलआर कोर्ट (2.5 अंक)
- ई-मापी (10 अंक)
- डीएम कोर्ट (10 अंक)
इन सभी मापदंडों पर प्रदर्शन के आधार पर बांका को 100 में से 65.52 अंक प्राप्त हुए हैं और वह शीर्ष पर है। शेखपुरा को 64.61 अंक मिले और वह दूसरे स्थान पर खिसक गया है। पूर्वी चंपारण ने 22वें स्थान से छलांग लगाकर तीसरा स्थान हासिल किया है।
सरकारी भूमि सत्यापन में शेखपुरा शीर्ष पर:
सरकारी भूमि सत्यापन में शेखपुरा ज़िला सबसे ऊपर है, जहां 96.40% प्लॉट्स वेरिफाइड हैं।
अन्य प्रमुख जिले इस श्रेणी में:
- लखीसराय: 94.21%
- पश्चिम चंपारण: 91.51%
- अरवल: 88.19%
- बक्सर: 88.04%
सरकारी भूमि के दाखिल-खारिज मामलों में पूर्वी चंपारण नंबर वन:
- पूर्वी चंपारण: 62.98% मामलों का निष्पादन
- सुपौल: 54.39%
- रोहतास: 53.04%
- अरवल: 50%
- मुंगेर: 49.45%
वहीं, अररिया, बक्सर, लखीसराय, सहरसा और सीतामढ़ी में अभी तक दाखिल-खारिज प्रक्रिया प्रारंभ ही नहीं हुई है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की यह रिपोर्ट न केवल जिलों के प्रशासनिक प्रदर्शन को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि योजनाओं का ज़मीनी लाभ आम नागरिकों तक कैसे और कहां तक पहुंच रहा है। यह रैंकिंग आगे की नीतियों और जवाबदेही तय करने में उपयोगी साबित होगी।








