विवेक कुमार यादव । ब्युरो । बिहार / झारखंड ।
पटना:
बाबू जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के सहयोग से बज्जिका लोकभाषा और परंपरागत गीत-संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। प्रख्यात लोकगायिका एवं आकाशवाणी पटना की उद्घोषिका श्रीमती गीता सिंह द्वारा संकलित एवं रचित पुस्तक “पारंपरिक लोकगीत” का भव्य लोकार्पण समारोह राजधानी पटना में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं मुख्य अतिथि पद्म भूषण डॉ. सी. पी. ठाकुर ने की, जबकि विशेष अतिथि के रूप में बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ, डॉ. नरेंद्र पाठक (निदेशक, बाबू जगजीवन राम संस्थान), लोकगायक श्री मनोरंजन ओझा, तथा मैथिली अकादमी सदस्य श्री हृदय नारायण झा उपस्थित थे। मंच संचालन दिल्ली विविध भारती की सुप्रसिद्ध उद्घोषिका सारिका पंकज ने किया।
???? सांस्कृतिक संरक्षण का सशक्त प्रयास:
कार्यक्रम का शुभारंभ गीता सिंह के स्वागत गीत और पारंपरिक झूमर से हुआ, जिसने उपस्थित श्रोताओं को लोकगंगा में सराबोर कर दिया।
डॉ. सी. पी. ठाकुर ने पुस्तक की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा:
“बज्जिका में रचित यह पुस्तक न केवल एक सांस्कृतिक दस्तावेज है, बल्कि भावी पीढ़ी के लिए एक अमूल्य धरोहर भी है। हमारे निजी उत्सवों में लोकगीतों की अनुपस्थिति की कल्पना नहीं की जा सकती।”
डॉ. अनिल सुलभ ने कहा:
“लोकगीत साहित्य का मूल स्रोत हैं। लोक-कंठ से ही साहित्य का जन्म हुआ है। ऐसी पुस्तकों को घर-घर तक पहुँचाने और लोक परंपराओं को जीवित रखने के लिए हम सभी को चिंतन और प्रयास करना चाहिए।”
डॉ. नरेंद्र पाठक ने कहा कि इस विषय पर और शोध तथा पुस्तकों की आवश्यकता है, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ सके।
दीपक ठाकुर ने बज्जिका में लिखी इस पुस्तक को दुर्लभ और भविष्य के लिए अनिवार्य दस्तावेज बताया।
???? लेखिका का उद्देश्य:
गीता सिंह ने अपने विचार साझा करते हुए कहा:
“यह संकलन हमारे बच्चों के लिए है, ताकि वे अपने लोकगीतों और सांस्कृतिक मूल्यों से कटे नहीं। यह प्रयास हमारी लोकपरंपरा को बचाने और उसे अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए किया गया है।”
कार्यक्रम के अंत में साहित्य, भाषा और लोक संस्कृति के क्षेत्र में इस पहल को एक नई साहित्यिक धारा की शुरुआत के रूप में देखा गया।








