UP Politics: प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों द्वारा कथित तौर पर खून बेचकर पढ़ाई का खर्च जुटाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी और पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने इस मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए निष्पक्ष जांच और छात्रों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है।
लखनऊ/जौनपुर(आदित्य सिंह, विशेष संवाददाता): उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे गरीब छात्रों द्वारा पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए अपना खून बेचने की मीडिया रिपोर्ट्स पर सियासत गरमा गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के यूपी प्रभारी और पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने इसे भाजपा सरकार की “शिक्षा विरोधी नीतियों का परिणाम” बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जवाब मांगा है।
मंगलवार को जौनपुर के मड़ियाहूं में ‘छात्रों के हक की बात, युवाओं के साथ’ कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा।
“ये कैसा रामराज्य, जहां खून बेचने को मजबूर हैं छात्र?”
युवाओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि प्रयागराज से सामने आई रिपोर्ट ने प्रदेश के युवाओं की भयावह सच्चाई उजागर कर दी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बताएं कि यह कैसा रामराज्य है, जहां गरीब परिवारों के बच्चों को महंगी कोचिंग, कमरे के किराए और भोजन का खर्च उठाने के लिए अपने शरीर को जोखिम में डालकर खून बेचना पड़ रहा है? प्रयागराज की यह घटना भाजपा सरकार के माथे पर कलंक है।”
₹8.08 लाख करोड़ का बजट, फिर भी शिक्षा पर कंजूसी क्यों?
कांग्रेस नेता ने यूपी सरकार के बजट आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ₹8.08 लाख करोड़ के भारी-भरकम बजट वाले उत्तर प्रदेश में छात्रों के लिए कोई ठोस राहत योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि साल 2025-26 के बजट विश्लेषण के मुताबिक शिक्षा पर प्रस्तावित खर्च कुल व्यय का मात्र 13.8 प्रतिशत रखा गया, जबकि राज्यों का तुलनात्मक औसत 15 प्रतिशत है। यह सीधे तौर पर शिक्षा के प्रति सरकार की उदासीनता को दिखाता है।
कांग्रेस ने योगी सरकार से पूछे ये 5 सीधे सवाल
- आर्थिक तंगी से जूझ रहे प्रतियोगी छात्रों की पहचान के लिए प्रदेशव्यापी सर्वे कब कराया जाएगा?
- जरूरतमंद छात्रों को तत्काल आर्थिक सहायता देने के लिए सरकार के पास क्या व्यवस्था है?
- छात्रवृत्ति (Scholarship) के लंबित भुगतानों और लाभान्वित छात्रों का पूरा हिसाब कब सार्वजनिक होगा?
- प्रयागराज जैसे शिक्षा केंद्रों में सस्ते छात्रावास, किफायती मेस और निःशुल्क पुस्तकालय की व्यवस्था कब होगी?
- लंबित भर्तियों, रिक्त पदों और रोजगार के सवालों पर सरकार समयबद्ध जवाब कब देगी?

राजेंद्र पाल गौतम ने मांग की है कि प्रयागराज के पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पीड़ित विद्यार्थियों को तत्काल चिकित्सा व आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने साफ कहा कि युवाओं को कोरे चुनावी भाषण नहीं, बल्कि रोजगार और सम्मानजनक शिक्षा चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों को तुरंत राहत और छात्रवृत्ति में पारदर्शिता नहीं मिली, तो पार्टी इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से उठाएगी।
Author: आदित्य सिंह, विशेष संवाददाता
आदित्य सिंह HTN न्यूज़ के साथ बतौर फ्रीलांस जर्नलिस्ट जुड़े हुए हैं। आदित्य प्राइम न्यूज़, न्यूज़ 11 भारत, इंडिया वॉइस और एपीएन न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित समाचार चैनलों में न्यूज़ एंकर और आउटपुट प्रोड्यूसर के तौर पर भी अपनी सेवा दे चुके हैं, डेस्क और स्टूडियो के साथ-साथ ज़मीनी पत्रकारिता उनकी मुख्य ताकत रही है। उन्होंने झारखंड के गोड्डा ज़िले के सुदूर इलाकों से लेकर राजधानी रांची और देश की राजधानी दिल्ली तक व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है। उन्होंने नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BA JMC) किया है।








